शनिवार, 27 नवंबर 2010

मैंने सब तैयारियां कर ली हैं मरने के लिए...!
छोड़ आया परछाई को पीछे, डरने के लिए...!
कितनी अजीब प्यास है, कम हुई पर बुझी नहीं...!
तुझसे तो अच्छे बहुत हैं, पर कोई तुझसा नही...!!
राजेश शुक्ल

सोमवार, 15 नवंबर 2010

कहीं आग लगे ..बिजली गिरे ....साला भूकंप आ जाए । जो कह दिया सो कह दिया ...बात मैं करूँगा साफ-साफ । चाहे मर जाए किसी का बाप....क्योंकी सियासत में ऐसी बातें ही होती है...