मैंने सब तैयारियां कर ली हैं मरने के लिए...!
छोड़ आया परछाई को पीछे, डरने के लिए...!
कितनी अजीब प्यास है, कम हुई पर बुझी नहीं...!
तुझसे तो अच्छे बहुत हैं, पर कोई तुझसा नही...!!
राजेश शुक्ल
सियासत.....
कहीं आग लगे ..बिजली गिरे ....साला भूकंप आ जाए । जो कह दिया सो कह दिया ...बात मैं करूँगा साफ-साफ । कहा जाता है कि सियासत मे अपना काम बनता,----- मराये जनता। लेकिन आदि काल से सियासत केवल् जनता के लिये होती थी। परन्तु अब सियासत जनता की होगी। जनता अपना फ़ैसला खुद करेगी । मै तो केवल् अपनी बात कहुगा। फ़ैसला भी जनता हि करेगी।।।.
शनिवार, 27 नवंबर 2010
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